ओबीसी आरक्षण विधेयक में फिर फंसा 'पंगा', राजस्थान हाई कोर्ट ने लगाई रोक
जयपुर। राजस्थान में पिछले काफी समय से चले आ रहे ओबीसी आरक्षण के मुद्दे का भले ही हाल में राजस्थान विधानसभा में हल निकल गया था, लेकिन अब इसमें एक बार फिर से पैच फंस गया है। ओबीसी आरक्षण विधेयक को लेकर दायर की गई याचिका पर आज राजस्थान हाई कोर्ट में सुनवाई करते हुए इस विधेयक की क्रियांवति पर रोक लगा दी गई है।
गौरतलब है कि राजस्थान विधानसभा में 26 अक्टूबर को ओबीसी आरक्षण विधेयक 2017 पारित किया गया था, जिसके बाद ओबीसी आरक्षण का कोटा 21 से बढ़कर 26 फीसदी हो गया था। वहीं कुल आरक्षण भी अधिकतम सीमा को पार करते हुए 54 फीसदी हो गया था। ऐसे में इस विधेयक की संवैधानिकता को चुनौती देते हुए गंगाशहाय शर्मा ने याचिका दायर की थी, जिस पर सुनवाई कीते हुए हाईकोर्ट ने इसकी क्रियांवती पर रोक लगा दी है।
याचिका में कहा गया था कि सुप्रीम कोर्ट की ओर से यथास्थिति के बावजूद भी बिल को पास किया गया है। इस बिल के जरिये गुर्जरों को ओबीसी में 5 फीसदी आरक्षण दिया गया है, जिसके बाद ओबीसी आरक्षण 21 फीसदी से बढ़कर 26 फीसदी हो गया है। वहीं कुल आरक्षण भी अधिकतम सीमा को पार कर 54 फीसदी हो गया है। ऐसे में आज हाईकोर्ट में जस्टिस के एस झवेरी की खण्डपीठ ने विधेयक की क्रियांवती पर रोक लगा दी है।
राजस्थान विधानसभा के सत्र के दौरान 26 अक्टूबर को विपक्ष के हंगामें के बीच पारित किए गए ओबीसी आरक्षण विधेयक 2017 की क्रियांवति पर आज हाई कोर्ट ने रोक लगा दी है। इस विधेयक को लेकर दायर की गई एक याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने इसकी क्रियांवति पर रोक लगा दी। ऐसे में लम्बे समय से चला आ रहा ओबीसी आरक्षण का मुद्दा एक बार फिर से अटक गया है।
आपको बता दें कि राजस्थान विधानसभा में पिछड़ा वर्ग नौकरियों और शैक्षणिक संस्थाओं में आरक्षण विधेयक, 2017 पेश किया गया था। पेश हुए नए बिल में ओबीसी आरक्षण को दो कैटिगरी में बांटा गया था। पहली कैटिगरी में पहले की तरह 21 फीसदी आरक्षण जबकि दूसरी कैटिगरी में गुर्जर और बंजारा समेत 5 जातियों के लिए 5 फीसदी आरक्षण का अतिरिक्त प्रावधान किया गया था।
गौरतलब है कि राजस्थान विधानसभा में 26 अक्टूबर को ओबीसी आरक्षण विधेयक 2017 पारित किया गया था, जिसके बाद ओबीसी आरक्षण का कोटा 21 से बढ़कर 26 फीसदी हो गया था। वहीं कुल आरक्षण भी अधिकतम सीमा को पार करते हुए 54 फीसदी हो गया था। ऐसे में इस विधेयक की संवैधानिकता को चुनौती देते हुए गंगाशहाय शर्मा ने याचिका दायर की थी, जिस पर सुनवाई कीते हुए हाईकोर्ट ने इसकी क्रियांवती पर रोक लगा दी है।
याचिका में कहा गया था कि सुप्रीम कोर्ट की ओर से यथास्थिति के बावजूद भी बिल को पास किया गया है। इस बिल के जरिये गुर्जरों को ओबीसी में 5 फीसदी आरक्षण दिया गया है, जिसके बाद ओबीसी आरक्षण 21 फीसदी से बढ़कर 26 फीसदी हो गया है। वहीं कुल आरक्षण भी अधिकतम सीमा को पार कर 54 फीसदी हो गया है। ऐसे में आज हाईकोर्ट में जस्टिस के एस झवेरी की खण्डपीठ ने विधेयक की क्रियांवती पर रोक लगा दी है।
राजस्थान विधानसभा के सत्र के दौरान 26 अक्टूबर को विपक्ष के हंगामें के बीच पारित किए गए ओबीसी आरक्षण विधेयक 2017 की क्रियांवति पर आज हाई कोर्ट ने रोक लगा दी है। इस विधेयक को लेकर दायर की गई एक याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने इसकी क्रियांवति पर रोक लगा दी। ऐसे में लम्बे समय से चला आ रहा ओबीसी आरक्षण का मुद्दा एक बार फिर से अटक गया है।
आपको बता दें कि राजस्थान विधानसभा में पिछड़ा वर्ग नौकरियों और शैक्षणिक संस्थाओं में आरक्षण विधेयक, 2017 पेश किया गया था। पेश हुए नए बिल में ओबीसी आरक्षण को दो कैटिगरी में बांटा गया था। पहली कैटिगरी में पहले की तरह 21 फीसदी आरक्षण जबकि दूसरी कैटिगरी में गुर्जर और बंजारा समेत 5 जातियों के लिए 5 फीसदी आरक्षण का अतिरिक्त प्रावधान किया गया था।
