श्री प्रेम प्रकाश आश्रम में देव प्रतिमाओं की प्राण-प्रतिष्ठा, ध्वजावंदन, संतसमागम हुए धार्मिक कार्यक्रम
इन्दौर से आए गुरमुखदास जी एवं परमानन्द (पिन्टू) ने अपने भजनों से उपस्थित श्रद्धालुओं को भाव विभोर कर दिया। साथ ही शहनाई वादन के साथ ”प्रेम प्रकाश ध्वज“ फहराया गया। इस अवसर पर वासुदेव देवनानी, अनिता भदेल, उपमहापौर संपत सांखला, अलवर के विधायक ज्ञानदेव आहूजा, जयकिशन पारवानी समेत कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे। तत्पश्चात् सत्संग, संत समागम आश्रम के सत्संग हॉल में हुआ। संत समागम में प्रेम प्रकाश मंडलाध्यक्ष स्वामी भगत प्रकाश जी महाराज के साथ स्वामी ब्रह्मानन्द शास्त्री, कोटा के संत मनोहर लाल, ग्वालियर के संत हरिओम लाल, दिल्ली के संत स्वामी जयदेव जी महाराज, अहमदाबाद के संत मोनूराम जी, मनोहरानन्द दरबार के स्वामी स्वरूप दास महाराज, ग्वालानन्द दरबार के संत, माता ज्ञानज्योति, अहमदाबाद की पुष्पा बहन एवं अन्य कई स्थानों से आए कई संत महात्मा शामिल हुए। संत सभा का संचालन संत ओमप्रकाश कुशलतापूर्वक कर रहे थे। अजमेर व बाहर से आए हुए संत-महात्माओं ने आश्रम के संतों, सेवादारियों एवं उपस्थित श्रद्धालुओं को नये आश्रम के उद्घाटन की कोटि-कोटि बधाई दी। साथ ही संतों महात्माओं की उपस्थिति में आम भण्डारा हुआ।
सायंकालीन सत्संग सभा में सर्व प्रथम कृष्ण लीला का मंचन किया गया। बाद में विभिन्न गायकों कलाकारों ने भजनों की प्रस्तुती दी जिनमें उल्हास नगर से आईं सुमन खेमलानी प्रमुख थीं, जिन्होंने अपने भजनों से उपस्थित श्रद्धालुओं को झूमने पर मजबूर कर दिया। स्वामी ब्रह्मानन्द शास्त्री ने अपने प्रवचन में बताया कि सत्संग का वास्तविक अर्थ है जीवन में सदाचार आना। जीवन में सद्व्यवहार करना। अच्छा आचार-विचार करना चाहिये। आज स्वामी बसंतराम महाराज का पुण्यतिथि दिवस है। आज के दिन पर हम सबका यहाँ आना तभी सफल माना जाएगा जब हम उनके सद्गुणों को अपने जीवन में अपनायेंगे एवं उनके समान बनने का प्रयास करेंगे। गुरू चरणों में यही प्रार्थना करें कि हमारा नाम सिमरन में मन लगे। उसके बाद प्रसाद वितरण हुआ।