विवेक बत्ता ने देहदान कर अपने पिता का सपना किया पूरा - Kekri Insight

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विवेक बत्ता ने देहदान कर अपने पिता का सपना किया पूरा

जयपुर। पुरी उम्र लोगों की सेवा का संकल्प लेने वाले सुरेंद्र मोहन बत्ता मृत्यु के बाद भी अपने संकल्प को पूरा किया। उन्होंने ना केवल अपना देहदान जयपुर एसएमएस हॉस्पिटल को दान किया वही अपनी आंखों को दान कर दो व्यक्तियों के जीवन में नई रोशनी दी। उन्होंने सन 2003 में ही अपने परिवार वालों से इस कार्य हेतु इच्छा जाहिर कर दी थी।


73 साल की उम्र में वरिष्ठ अध्यापक रहे सुरेंद्र मोहन बत्ता जिन्होंने पंजाब स्टेट एजुकेशन बोर्ड मैं अपनी अंग्रेजी विषय में अपनी सेवाएं दी थी। वही से सन 2005 में रिटायर हुए सुरेंद्र मोहन बत्ता पुत्र किशनलाल बत्ता अपने जीवन काल में समाज को प्रशिक्षित किया। वही जीवन के अंतिम क्षड़ो में जाते-जाते समाज के लिए एक मिसाल छोड़कर गए।

उनका मानना था यदि मृत्यु के बाद भी उनका शरीर किसी की जरूरत बन सके तो दे दान से बड़ा पुण्य कुछ और हो नहीं सकता बीते कुछ सालों में देह दान के प्रति समाज में जागरूकता आई है। यही वजह है जिसके चलते स्वर्गीय सुरेंद्र मोहन बताने जयपुर एसएमएस अस्पताल को नेत्रदान व देह दान करने का संकल्प लिया था।


सुरेंद्र मोहन बत्ता की तबियत काफी समय से खराब थी । उनकी मृत्यु 16 जनवरी  मंगलवार शाम  करीब 6:30 बजे हुई। इसके बाद उनके पहले नेत्र दान किये गए उसके पश्चात अगले दिन देह दान किया गया ।

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