'प्लेन एक्सीडेंट में नहीं हुई थी नेताजी सुभाषचंद्र बोस की मौत'
होशंगाबाद। देश की स्वतंत्रता में अहम किरदार अदा करने वाले महापुरूष नेताजी सुभाषचंद्र बोस की मौत आज भी लोगों के लिए एक रहस्य बनी हुई। हालांकि नेताजी की मौत को लेकर कही जाने वाली तमाम बातों में कहा जाता है कि उनकी एक प्लेन एक्सीडेंट में मौत हो गई थी। इस बात को अब उस युवती ने सिर से खारिज किया है, जो नेताजी सुभाषचंद्र बोस की परपौत्री लगती है।
होशंगाबाद आर्ष गुरूकुल पहुंची नेताजी सुभाषचंद्र बोस की परपौत्री राजश्री चौधरी ने कहा कि, 'नेताजी सुभाषचंद्र बोस की मृत्यु विमान दुर्घटना में नहीं हुई थी यह बात उजागर हो चुकी है ऐसे में सरकार भारत के प्रथम राष्ट्रप्रधान नेताजी की मृत्यु के तथ्य सभी शासकीय दस्तावेजों से हटाए।'
राष्ट्रीय स्वाभिमान की पुर्नस्थापना के लिए चलाए जा रहे अभियान के तहत सोमवार को नेताजी की परपौत्री राजश्री होशंगाबाद पहुंची। उन्होंने गुरूकुुल में अभियान की जानकारी गुरूकुल के शिष्यों सहित लोगों को देते हुए हस्ताक्षर अभियान चलाया। इस दौरान उन्होंने नेताजी पर लगाया गया युद्ध अपराधी का आरोप हटाने सहित भारत सरकार से कॉमनवेल्थ ग्रुप छोड़ने की भी मांग की।
गुरूकुल में छात्रों से चर्चा के दौरान राजश्री ने कहा कि सैकड़ों वर्ष तक भारत गुलाम रहा है और आज भी भारत गुलाम है, क्योंकि जब तक भारत राष्ट्रमंडल (कॉमनवेल्थ) की सदस्यता नहीं छोड़ता, तब तक आजादी पूर्ण नहीं होगी। उन्होंने बताया कि नेताजी सुभाषचंद्र बोस चाहते थे कि भारत को पूर्ण स्वराज मिले। इसी बात की लड़ाई लडऩे के लिए उन्होंने आजाद हिंद फौज की स्थापना की थी, जिसके सकारात्मक परिणाम भी सामने आने लगे थे।
राजश्री ने बताया कि इसी बीच भारत के तत्कालीन राजनेताओं ने सत्ता के लालच में ब्रिटिशों से मिलकर षडय़ंत्र पूर्वक लापता घोषित करवा दिया। जबकि नेताजी जीवित थे और उन्होंने कई लोगों से मुलाकात की, जिसके प्रमाण भी हैं। इसके बावजूद उन्हें प्लेन क्रेश की अफवाह उड़ाकर मृत घोषित कर दिया था।
नेताजी सुभाषचंद्र बोस की परपौत्री राजश्री चौधरी ने बताया कि आजाद हिंद फौज ने कभी किसी के सामने समर्पण नहीं किया। सेना के सैनिक नि:स्वार्थ भाव से लड़ते थे और जीतकर ही वापस आते थे, जबकि कई देशों की सेनाओं ने द्वितीय विश्व युद्ध में समर्पण कर दिया था। आज भी नेताजी सुभाषचंद्र बोस आजाद है।
होशंगाबाद आर्ष गुरूकुल पहुंची नेताजी सुभाषचंद्र बोस की परपौत्री राजश्री चौधरी ने कहा कि, 'नेताजी सुभाषचंद्र बोस की मृत्यु विमान दुर्घटना में नहीं हुई थी यह बात उजागर हो चुकी है ऐसे में सरकार भारत के प्रथम राष्ट्रप्रधान नेताजी की मृत्यु के तथ्य सभी शासकीय दस्तावेजों से हटाए।'
राष्ट्रीय स्वाभिमान की पुर्नस्थापना के लिए चलाए जा रहे अभियान के तहत सोमवार को नेताजी की परपौत्री राजश्री होशंगाबाद पहुंची। उन्होंने गुरूकुुल में अभियान की जानकारी गुरूकुल के शिष्यों सहित लोगों को देते हुए हस्ताक्षर अभियान चलाया। इस दौरान उन्होंने नेताजी पर लगाया गया युद्ध अपराधी का आरोप हटाने सहित भारत सरकार से कॉमनवेल्थ ग्रुप छोड़ने की भी मांग की।
गुरूकुल में छात्रों से चर्चा के दौरान राजश्री ने कहा कि सैकड़ों वर्ष तक भारत गुलाम रहा है और आज भी भारत गुलाम है, क्योंकि जब तक भारत राष्ट्रमंडल (कॉमनवेल्थ) की सदस्यता नहीं छोड़ता, तब तक आजादी पूर्ण नहीं होगी। उन्होंने बताया कि नेताजी सुभाषचंद्र बोस चाहते थे कि भारत को पूर्ण स्वराज मिले। इसी बात की लड़ाई लडऩे के लिए उन्होंने आजाद हिंद फौज की स्थापना की थी, जिसके सकारात्मक परिणाम भी सामने आने लगे थे।
राजश्री ने बताया कि इसी बीच भारत के तत्कालीन राजनेताओं ने सत्ता के लालच में ब्रिटिशों से मिलकर षडय़ंत्र पूर्वक लापता घोषित करवा दिया। जबकि नेताजी जीवित थे और उन्होंने कई लोगों से मुलाकात की, जिसके प्रमाण भी हैं। इसके बावजूद उन्हें प्लेन क्रेश की अफवाह उड़ाकर मृत घोषित कर दिया था।
नेताजी सुभाषचंद्र बोस की परपौत्री राजश्री चौधरी ने बताया कि आजाद हिंद फौज ने कभी किसी के सामने समर्पण नहीं किया। सेना के सैनिक नि:स्वार्थ भाव से लड़ते थे और जीतकर ही वापस आते थे, जबकि कई देशों की सेनाओं ने द्वितीय विश्व युद्ध में समर्पण कर दिया था। आज भी नेताजी सुभाषचंद्र बोस आजाद है।
