बाल विवाह की रोकथाम के लिए भदेल ने की प्रदेष के सभी जिला कलेक्टर और अधिकारियों से वीडियो कॉन्फ्रेसिंग
अजमेर। महिला एवं बाल विकास राज्य मंत्री अनिता भदेल ने बुधवार को बाल विवाह की रोकथाम के लिए राज्य के सभी जिला कलेक्टर, पुलिस अधीक्षक, मुख्य कार्यकारी अधिकारी, जिला परिषद, उपनिदेशक, महिला एवं बाल विकास विभाग, कार्यक्रम अधिकारी महिला अधिकारिता, उपखण्ड अधिकारी, उप पुलिस अधीक्षक, बाल विकास परियोजना अधिकारियों के साथ विडियो कॉन्फ्रेंस कर तैयारियों का जायजा लिया।
भदेल ने बाल विवाह की गहनता को ध्यान में रखते हुए क्रमवार जिलों के कलक्टरों, पुलिस अधीक्षकों एवं अन्य अधिकारियों से चर्चा कर निर्देश दिए। जिला प्रशासन से बाल विवाह रोकथाम हेतु की जा रही तैयारियों की जानकारी ली गई एवं उनको बाल विवाह रोकथाम के लिए प्रभावी कार्यवाही करने के निर्देश प्रदान किए गए। उन्होंने कहा कि जिला प्रशासन को अपना सूचना तंत्र मजबूत किए जाने की आवश्यकता है एवं ग्राम पंचायत स्तर पर विभिन्न कार्मिकों एवं कार्यकर्ताओं को पाबन्द किया जावे कि वे उनके क्षेत्र में आयोजित विवाहों में भाग लेकर यह सुनिश्चित करें कि बाल विवाह सम्पन्न ना हों।
भदेल ने कहा कि बाल विवाह की सूचनाओं पर कार्यवाही के साथ ही स्वतः संज्ञान लेते हुए भी बाल विवाह रोकथाम की कार्यवाही की जाए एवं आवश्यकता पडने पर एफ.आई.आर भी दर्ज करवाई जाए। कॉन्फ्रेंस के दौरान विभिन्न जिलों के अधिकारियों द्वारा बाल विवाह रोकथाम के लिए किए जा रहे नवाचारों की भी जानकारी दी गई।
सचिव कुलदीप रांका ने बताया कि कि प्रदेश में अक्षय तृतीया एवं पीपल पूर्णिमा जैसे अवसरों पर बाल विवाह की अधिक संभावना रहती है। ये पर्व इस वर्ष क्रमशः 28 अप्रेल और 10 मई को हैं। इन अवसरों पर बाल विवाह ना हो इसके लिए सघन प्रचार-प्रसार अभियान किया जाए। ग्राम पंचायत स्तर पर विभिन्न कार्मिकों यथा पटवारी, ग्राम सेवक, आंगनबाडी कार्यकर्ता, साथिन, सहयोगिनी, बीट-कान्सटेबल आदि द्वारा यह ध्यान रखा जाए कि उन क्षेत्रों में बाल विवाह सम्पन्न ना हों।
उन्होंने कहा कि यदि बाल विवाह से संबंधित कोई भी सूचना प्राप्त हो तो संबंधित बाल विवाह प्रतिषेध अधिकारी को तुरन्त सूचना दी जावे। बाल विवाह रोकथाम हेतु जिला एवं ब्लाॅक स्तर पर कन्ट्रोल रूम स्थापित किए जाएं। उन्होंने कहा कि बाल विवाह की सूचना चाइल्ड हैल्पलाइन नम्बर -1098 पर भी दी जा सकती है।
भदेल ने बाल विवाह की गहनता को ध्यान में रखते हुए क्रमवार जिलों के कलक्टरों, पुलिस अधीक्षकों एवं अन्य अधिकारियों से चर्चा कर निर्देश दिए। जिला प्रशासन से बाल विवाह रोकथाम हेतु की जा रही तैयारियों की जानकारी ली गई एवं उनको बाल विवाह रोकथाम के लिए प्रभावी कार्यवाही करने के निर्देश प्रदान किए गए। उन्होंने कहा कि जिला प्रशासन को अपना सूचना तंत्र मजबूत किए जाने की आवश्यकता है एवं ग्राम पंचायत स्तर पर विभिन्न कार्मिकों एवं कार्यकर्ताओं को पाबन्द किया जावे कि वे उनके क्षेत्र में आयोजित विवाहों में भाग लेकर यह सुनिश्चित करें कि बाल विवाह सम्पन्न ना हों।
भदेल ने कहा कि बाल विवाह की सूचनाओं पर कार्यवाही के साथ ही स्वतः संज्ञान लेते हुए भी बाल विवाह रोकथाम की कार्यवाही की जाए एवं आवश्यकता पडने पर एफ.आई.आर भी दर्ज करवाई जाए। कॉन्फ्रेंस के दौरान विभिन्न जिलों के अधिकारियों द्वारा बाल विवाह रोकथाम के लिए किए जा रहे नवाचारों की भी जानकारी दी गई।
सचिव कुलदीप रांका ने बताया कि कि प्रदेश में अक्षय तृतीया एवं पीपल पूर्णिमा जैसे अवसरों पर बाल विवाह की अधिक संभावना रहती है। ये पर्व इस वर्ष क्रमशः 28 अप्रेल और 10 मई को हैं। इन अवसरों पर बाल विवाह ना हो इसके लिए सघन प्रचार-प्रसार अभियान किया जाए। ग्राम पंचायत स्तर पर विभिन्न कार्मिकों यथा पटवारी, ग्राम सेवक, आंगनबाडी कार्यकर्ता, साथिन, सहयोगिनी, बीट-कान्सटेबल आदि द्वारा यह ध्यान रखा जाए कि उन क्षेत्रों में बाल विवाह सम्पन्न ना हों।
उन्होंने कहा कि यदि बाल विवाह से संबंधित कोई भी सूचना प्राप्त हो तो संबंधित बाल विवाह प्रतिषेध अधिकारी को तुरन्त सूचना दी जावे। बाल विवाह रोकथाम हेतु जिला एवं ब्लाॅक स्तर पर कन्ट्रोल रूम स्थापित किए जाएं। उन्होंने कहा कि बाल विवाह की सूचना चाइल्ड हैल्पलाइन नम्बर -1098 पर भी दी जा सकती है।
