Video : रामगढ़ शेखावाटी - द ओपन आर्ट गैलेरी : संरक्षण के अभाव में 'कहीं निकल नं जाए प्राण रे...'
सीकर। राजस्थान में सीकर जिले के अंतिम छोर पर बसा गांव रामगढ़ शेखावाटी, जिसे रामगढ़ सेठान के नाम से भी जाना जाता है। यह दुनिया की सबसे पहली ओपन आर्ट गैलेरी के रूप में पहचाना जाता है। ओपन आर्ट गैलरी के रूप में विख्यात शेखावाटी क्षेत्र में बसे इस गांव में सैकड़ों की तादाद मे ऐतिहासिक हवेलियां और प्राचीन छतरियां मौजूद है, जो यहां आने वाले लोगों को बरबस ही अपनी ओर आकर्षित कर लेती है। इन हवेलियों और छतरियों पर बनी प्राचीन एवं पारंपरिक पैंटिंग्स भी हर किसी को लुभा लेती है। किसी समय में राजा-महाराजाओं के रहने के लिए बनाई गई इन छतरियों के साथ ही यहां के पोद्दार सेठों द्वारा बनाई गई कई प्राचीन हवेलियां आज धूल खा रही है, जिन्हें संभालने वाला कोई नजर नहीं आता।
कभी राजा-महाराजाओं के रहने के लिए बनाई गई इन छतरियों और हवेलियों पर जमा धूल और खंडहर में तब्दील होती ये ऐतिहासिक इमारतें और समय के स्वर्णिम इतिहास को दर्शाती है, जिसे देखकर हर कोई गौरवांवित महसूस करता है। इन हवेलियों और छतरियों को देखकर ऐसा लगता है, जैसे इन हवेलियों और छतरियों के स्वर्णिम इतिहास को बताने के लिए मानों वक्त ठहर सा गया हो।
राजस्थान के झुंझुनू, सीकर और चुरू जिलों में फैले शेखावाटी इलाके में धरोहरों की भरमार है। यहां के 20 छोटे-बड़े क़स्बों में पांच हज़ार से अधिक धरोहरें बिखरी हैं। लेकिन यहां की हवेलियां सबसे बेहतरीन हैं। और इन पर बने भित्तिचित्रों की बदौलत ये इलाका दुनिया की सबसे बड़ी ओपन आर्ट गैलरी बन गया। लेकिन ये हवेलियां और दूसरी धरोहरें समय की मार झेलते हुए अपनी आभा खो रही हैं। शेखावाटी की ये हवेलियां गोयनका, सिंघानिया, पोद्दार और मोरारका जैसे देश के बड़े उद्योगपति और करोड़पति घरानों की हैं, जहां अरसों पहले वे रहा करते थे। लेकिन अब व्यवसाय के चलते ये घराने बाहर चले गए हैं। ऐसे में ये शानदार ऐतिहासिक धरोहरें अपना अस्तित्व खोती जा रही है।
दरअसल, इन हवेलियों पर सरकार का कोई अधिकार नहीं है। दूसरी ओर कुछेक हवेलियों को छोड़कर बाकी के मालिक इनकी खैर-खबर नहीं ले रहे हैं। हालांकि मालिकों ने चैकीदार के भरोसे इन्हें पयर्टकों के लिए जरूर खोल दिया। रामगढ़ शेखवाटी में करीब 100 हवेली और 40 छतरियां हैं, जिन पर बनी हैंडीक्राफ्ट डिजाइंस को यूएस और यूरोप में खासा पसंद किया जाता है। साथ ही इन हवेलियों व छतरियों के गौरवमयी इतिहास को जानने और इन पर बनी शानदार कलाकृतियों को देखने के लिए हर साल करीब एक हजार से ज्यादा पर्यटक यहां आते हैं। यहां की हवेलियां दूसरी हवेलियों से बिल्कुल अलग हैं, खासकर इस तरह की फ्रेस्को पेंटिंग तो पहले कभी नहीं देखी।
ओपन आर्ट गैलरी के नाम से देश-विदेश में पहचान बना चुका शेखावाटी आज यूरोपीय पर्यटकों खासकर फ्रांसीसियों की पहली पसंद बन गया है। यहां आने वाला हर तीसरा पर्यटक फ्रांसीसी होता है। यकीन न हो तो पर्यटन विभाग के आंकड़े देख लें। शेखावाटी के तीन जिलों (सीकर, चूरू, झंझुनूं) में से अकेले झंझुनूं में साल 2011 में 36,000 से ज्यादा विदेशी सैलानी आए। इनमें से 14,000 से ज्यादा फ्रांसीसी थे।
बताया जाता है ये भित्ति चित्र करीब 150 से 200 साल से भी ज्यादा पुराने हैं, जिन्हें दीवार पर चूने का प्लास्टर करते वक्त बनाया जाता था। पत्थर की पिसाई कर उन्हें पेड़-पौधों की पत्तियों और प्राकृतिक रंगों के साथ गीले प्लास्टर में मिलाकर तालमेल से पेंटिंग हवेली की दीवारों पर उकेरा जाता था। गीले प्लास्टर में ये रंग पूरी तरह समा जाते थे। इस तरह के रंग फैलने की बजाए अंदर तक जड़ पकड़ कर लेते थे। तभी तो 200 वर्ष पुरानी ये पेंटिंग आज भी नयनाभिराम हैं।
कभी राजा-महाराजाओं के रहने के लिए बनाई गई इन छतरियों और हवेलियों पर जमा धूल और खंडहर में तब्दील होती ये ऐतिहासिक इमारतें और समय के स्वर्णिम इतिहास को दर्शाती है, जिसे देखकर हर कोई गौरवांवित महसूस करता है। इन हवेलियों और छतरियों को देखकर ऐसा लगता है, जैसे इन हवेलियों और छतरियों के स्वर्णिम इतिहास को बताने के लिए मानों वक्त ठहर सा गया हो।
राजस्थान के झुंझुनू, सीकर और चुरू जिलों में फैले शेखावाटी इलाके में धरोहरों की भरमार है। यहां के 20 छोटे-बड़े क़स्बों में पांच हज़ार से अधिक धरोहरें बिखरी हैं। लेकिन यहां की हवेलियां सबसे बेहतरीन हैं। और इन पर बने भित्तिचित्रों की बदौलत ये इलाका दुनिया की सबसे बड़ी ओपन आर्ट गैलरी बन गया। लेकिन ये हवेलियां और दूसरी धरोहरें समय की मार झेलते हुए अपनी आभा खो रही हैं। शेखावाटी की ये हवेलियां गोयनका, सिंघानिया, पोद्दार और मोरारका जैसे देश के बड़े उद्योगपति और करोड़पति घरानों की हैं, जहां अरसों पहले वे रहा करते थे। लेकिन अब व्यवसाय के चलते ये घराने बाहर चले गए हैं। ऐसे में ये शानदार ऐतिहासिक धरोहरें अपना अस्तित्व खोती जा रही है।
दरअसल, इन हवेलियों पर सरकार का कोई अधिकार नहीं है। दूसरी ओर कुछेक हवेलियों को छोड़कर बाकी के मालिक इनकी खैर-खबर नहीं ले रहे हैं। हालांकि मालिकों ने चैकीदार के भरोसे इन्हें पयर्टकों के लिए जरूर खोल दिया। रामगढ़ शेखवाटी में करीब 100 हवेली और 40 छतरियां हैं, जिन पर बनी हैंडीक्राफ्ट डिजाइंस को यूएस और यूरोप में खासा पसंद किया जाता है। साथ ही इन हवेलियों व छतरियों के गौरवमयी इतिहास को जानने और इन पर बनी शानदार कलाकृतियों को देखने के लिए हर साल करीब एक हजार से ज्यादा पर्यटक यहां आते हैं। यहां की हवेलियां दूसरी हवेलियों से बिल्कुल अलग हैं, खासकर इस तरह की फ्रेस्को पेंटिंग तो पहले कभी नहीं देखी।
ओपन आर्ट गैलरी के नाम से देश-विदेश में पहचान बना चुका शेखावाटी आज यूरोपीय पर्यटकों खासकर फ्रांसीसियों की पहली पसंद बन गया है। यहां आने वाला हर तीसरा पर्यटक फ्रांसीसी होता है। यकीन न हो तो पर्यटन विभाग के आंकड़े देख लें। शेखावाटी के तीन जिलों (सीकर, चूरू, झंझुनूं) में से अकेले झंझुनूं में साल 2011 में 36,000 से ज्यादा विदेशी सैलानी आए। इनमें से 14,000 से ज्यादा फ्रांसीसी थे।
बताया जाता है ये भित्ति चित्र करीब 150 से 200 साल से भी ज्यादा पुराने हैं, जिन्हें दीवार पर चूने का प्लास्टर करते वक्त बनाया जाता था। पत्थर की पिसाई कर उन्हें पेड़-पौधों की पत्तियों और प्राकृतिक रंगों के साथ गीले प्लास्टर में मिलाकर तालमेल से पेंटिंग हवेली की दीवारों पर उकेरा जाता था। गीले प्लास्टर में ये रंग पूरी तरह समा जाते थे। इस तरह के रंग फैलने की बजाए अंदर तक जड़ पकड़ कर लेते थे। तभी तो 200 वर्ष पुरानी ये पेंटिंग आज भी नयनाभिराम हैं।
