राजधानी में बिखरी साहित्य की छठाएं, जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल का हुआ रंगारंग आगाज
जयपुर। साहित्य के महाकुंभ के रूप में दुनियाभर में पहचान बना चुके जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल का आज शानदार आगाज हुआ, जिसमें कई गणमान्य अतिथियों ने फ्रंट लॉन में भारतीय संस्कृति की छठा के साथ फेस्टिवल की शुरूआत की। फेस्टिवल के आगाज में फ्रंट लॉन में मीता पंडित की स्वरी लहरियों के साथ की गई। उद्घाटन समारोह में जेएलएफ सीईओ संजोय रॉय ने लिटरेचर फेस्टिवल की अब तक की यात्रा के बारे में अवगत करवाया, वहीं नमिता और विलियम ने देश-विदेश से आए हुए साहित्यकारों को शुभकामनाएं दी।
लिटफेस्ट के नाम से विश्वविख्यात जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल की शुरूआत के पहले दिन आज 6 पांडाल में कुल 32 सेशन का आयोजित किए गए। वहीं विभिन्न सेशन्स में कई बुक भी लॉन्च की गई। 5 दिनों तक चलने वाले इस आयोजन में कुल 181 सेशन आयोजित किए जाएंगे, जिनमें देश—दुनिया के कई ख्यातनाम साहित्यकार एवं कला जगत से जुड़ी नामचीन हस्तियां शिरकत करेंगी। यहां विभिन्न लॉन्स में आयोजित किए जाने सेशन्स में वे लोगों से संवाद कर विभिन्न विषयों पर अपने अनुभव एवं विचार शेयर करेंगे।
फेस्टिवल के पहले दिन मशहूर तबला वादक जाकिर हुसैन ने अपने जीवन से जुड़े कई पहलू लोगों के साथ साझा किए। जाकिर ने बताया कि बचपन में जब मुगल—ए—आजम फिल्म बन रही थी, तब उन्हें सलीम के बचपन का किरदार निभाने का मौका मिला था। लेकिन उनके पिता उन्हें तबलावादक बनाना चाहते थे और तब उन्हें उनके पिता ने वह काम नहीं करने दिया, वरना आज जाकिर हुसैन तबला वादक की जगह फिल्मी सितारे होते।
वहीं जाकिर हुसैन ने विवादों में घिरी संजय लीला भंसाली की फिल्म पद्मावत और उसको लेकर मच रहे बवाल के बारे में भी अपने विचार रखे। उन्होंने इस विवाद पर अपनी राय रखते हुए कहा कि देश में और भी कई प्रमुख मुद्दे हैं, जिन पर हम सब को सोचना चाहिए। एक फिल्म सिर्फ 7 दिन की होती है, लेकिन पर्यावरण जैसे मुद्दे हमेशा के और हमें पर्यावरण की सुरक्षा करनी चाहिए।
वहीं एक अन्य सेशन में राजस्थान की पूर्व राज्यपाल मार्गेट अलवा ने भी हिस्सा लिया। अलवा ने महिला सशक्तिकरण के विषय पर परिचर्चा की, जिसमें उन्होंने कहा कि महिलाओं पर अत्याचार हो रहा है, लेकिन महिलाएं चुप है। जबकि महिलाओं को पुरजोर तरीके से अपनी बात रखनी चाहिए। परिचर्चा के दौरान अलवा ने हरिदेव जोशी इस्तीफे प्रकरण को भी सबके सामने रखा। अलवा ने कहा कि तब राजस्थान में सती प्रथा को लेकर मैंने तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी को इस्तीफा सौंप दिया था, लेकिन राजीव गांधी ने मेरा इस्तीफा स्वीकार नहीं किया और पूरे मामले पर तत्कालीन राजस्थान मुख्यमंत्री हरिदेव जोशी से इस्तीफा लिया था।
आपको बता दें कि जेएलएफ—2018 में इस बार 35 देशों से करीब 600 से अधिक साहित्यकार शिरकत कर रहे हैं, जो समारोह में अपने शब्दों की गंगा बहाएंगे और अपने अपने अनुभव व विचार लोगों के साथ साझाा करेंगे। आयोजकों के मुताबिक, समारोह में शिरकत करने वाले साहित्यकारों की सूची में वर्ष 2006 में शांति नोबेल पुरस्कार प्राप्त कर चुके मोहम्मद युनूस, पुल्तिजर अवॉर्ड विनर हेलेन फील्डिंग जैसे लोग शामिल हैं। जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल के अभी तक हो चुके संस्करणों में दुनियाभर के कई ख्यातनाम साहित्यकार शिरकत कर चुके हैं, जिनमें अमिताभ बच्चन, गुलजार, प्रसून जोशी, सलमान रुश्दी, दलाई लामा, जावेद अख्तर समेत कई नामचीन साहित्यकार शामिल हैं।
लिटफेस्ट के नाम से विश्वविख्यात जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल की शुरूआत के पहले दिन आज 6 पांडाल में कुल 32 सेशन का आयोजित किए गए। वहीं विभिन्न सेशन्स में कई बुक भी लॉन्च की गई। 5 दिनों तक चलने वाले इस आयोजन में कुल 181 सेशन आयोजित किए जाएंगे, जिनमें देश—दुनिया के कई ख्यातनाम साहित्यकार एवं कला जगत से जुड़ी नामचीन हस्तियां शिरकत करेंगी। यहां विभिन्न लॉन्स में आयोजित किए जाने सेशन्स में वे लोगों से संवाद कर विभिन्न विषयों पर अपने अनुभव एवं विचार शेयर करेंगे।
फेस्टिवल के पहले दिन मशहूर तबला वादक जाकिर हुसैन ने अपने जीवन से जुड़े कई पहलू लोगों के साथ साझा किए। जाकिर ने बताया कि बचपन में जब मुगल—ए—आजम फिल्म बन रही थी, तब उन्हें सलीम के बचपन का किरदार निभाने का मौका मिला था। लेकिन उनके पिता उन्हें तबलावादक बनाना चाहते थे और तब उन्हें उनके पिता ने वह काम नहीं करने दिया, वरना आज जाकिर हुसैन तबला वादक की जगह फिल्मी सितारे होते।
वहीं जाकिर हुसैन ने विवादों में घिरी संजय लीला भंसाली की फिल्म पद्मावत और उसको लेकर मच रहे बवाल के बारे में भी अपने विचार रखे। उन्होंने इस विवाद पर अपनी राय रखते हुए कहा कि देश में और भी कई प्रमुख मुद्दे हैं, जिन पर हम सब को सोचना चाहिए। एक फिल्म सिर्फ 7 दिन की होती है, लेकिन पर्यावरण जैसे मुद्दे हमेशा के और हमें पर्यावरण की सुरक्षा करनी चाहिए।
वहीं एक अन्य सेशन में राजस्थान की पूर्व राज्यपाल मार्गेट अलवा ने भी हिस्सा लिया। अलवा ने महिला सशक्तिकरण के विषय पर परिचर्चा की, जिसमें उन्होंने कहा कि महिलाओं पर अत्याचार हो रहा है, लेकिन महिलाएं चुप है। जबकि महिलाओं को पुरजोर तरीके से अपनी बात रखनी चाहिए। परिचर्चा के दौरान अलवा ने हरिदेव जोशी इस्तीफे प्रकरण को भी सबके सामने रखा। अलवा ने कहा कि तब राजस्थान में सती प्रथा को लेकर मैंने तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी को इस्तीफा सौंप दिया था, लेकिन राजीव गांधी ने मेरा इस्तीफा स्वीकार नहीं किया और पूरे मामले पर तत्कालीन राजस्थान मुख्यमंत्री हरिदेव जोशी से इस्तीफा लिया था।
आपको बता दें कि जेएलएफ—2018 में इस बार 35 देशों से करीब 600 से अधिक साहित्यकार शिरकत कर रहे हैं, जो समारोह में अपने शब्दों की गंगा बहाएंगे और अपने अपने अनुभव व विचार लोगों के साथ साझाा करेंगे। आयोजकों के मुताबिक, समारोह में शिरकत करने वाले साहित्यकारों की सूची में वर्ष 2006 में शांति नोबेल पुरस्कार प्राप्त कर चुके मोहम्मद युनूस, पुल्तिजर अवॉर्ड विनर हेलेन फील्डिंग जैसे लोग शामिल हैं। जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल के अभी तक हो चुके संस्करणों में दुनियाभर के कई ख्यातनाम साहित्यकार शिरकत कर चुके हैं, जिनमें अमिताभ बच्चन, गुलजार, प्रसून जोशी, सलमान रुश्दी, दलाई लामा, जावेद अख्तर समेत कई नामचीन साहित्यकार शामिल हैं।
