विवादों की बजाय विचार-विमर्श किया जाना चाहिए : प्रसून जोशी
जयपुर। राजधानी जयपुर में चल रहे साहित्य के महाकुंभ जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल में एक ओर जहां कई साहित्यकारों एवं फिल्मी जगत की नामचीन शख्सियतों के पहुंचने का क्रम जारी है। वहीं दूसरी ओर संजय लीला भंसाली की फिल्म 'पद्मावत' को लेकर करणी सेना द्वारा दी गई चेतावनी के चलते सेंसर बोर्ड के चेयरमैन प्रसून जोशी इस बार इस फेस्टिवल में नहीं आ रहे हैं। ऐसे में प्रसून जोशी ने अपना स्टेटमेंट भेजकर अपनी बात कही है।
अपने स्टेटमेंट में प्रसून ने फेस्टिवल में शामिल नहीं हो पाने पर दुख जताया है, वहीं फिल्म पद्मावत को लेकर भी अपना पक्ष रखा है। प्रसून जोशी ने अपने स्टेटमेंट में लिखा कि, 'मैं इस बार Jlf में भाग नहीं ले पा रहा हूं। साहित्य और कविता के प्रेमियों के साथ Jlf में चर्चा और विचार विमर्श इस वर्ष न कर पाने का दुःख मुझे रहेगा, पर मैं नहीं चाहता कि मेरे कारण साहित्य प्रेमियों, आयोजकों और वहाँ आए अन्य लेखकों को कोई भी असुविधा हो और आयोजन अपनी मूल भावना से भटक जाए।
साथ ही उन्होेंने लिखा कि, 'रही बात फिल्म से जुड़े विवादों की, यहां मैं एक बार पुनः यह कहना चाहता हूं कि फ़िल्म पद्मावत को, नियमों के अंतर्गत सुझावों को जहां तक सम्भव हो सम्मिलित करते हुए, सकारात्मक सोच के साथ, भावनाओं का सम्मान करते हुए ही प्रमाणित किया गया है। ये पूरी निष्ठा से एक संतुलित और संवेदनशील निर्णय का प्रयास है।'
सेंसर बोर्ड चेयरमैन प्रसून जोशी ने साथ ही यह भी लिखा कि, 'अब थोड़ा विश्वास भी रखना होगा। विश्वास एक दूसरे पर भी और हमारी स्वयं की बनायी प्रक्रियाओं और संस्थाओं पर भी। विवादों की जगह विचार विमर्श को लेनी होगी, ताकि भविष्य में हमें इस सीमा तक जाने की आवश्यकता न पड़े।'
अपने स्टेटमेंट में प्रसून ने फेस्टिवल में शामिल नहीं हो पाने पर दुख जताया है, वहीं फिल्म पद्मावत को लेकर भी अपना पक्ष रखा है। प्रसून जोशी ने अपने स्टेटमेंट में लिखा कि, 'मैं इस बार Jlf में भाग नहीं ले पा रहा हूं। साहित्य और कविता के प्रेमियों के साथ Jlf में चर्चा और विचार विमर्श इस वर्ष न कर पाने का दुःख मुझे रहेगा, पर मैं नहीं चाहता कि मेरे कारण साहित्य प्रेमियों, आयोजकों और वहाँ आए अन्य लेखकों को कोई भी असुविधा हो और आयोजन अपनी मूल भावना से भटक जाए।
साथ ही उन्होेंने लिखा कि, 'रही बात फिल्म से जुड़े विवादों की, यहां मैं एक बार पुनः यह कहना चाहता हूं कि फ़िल्म पद्मावत को, नियमों के अंतर्गत सुझावों को जहां तक सम्भव हो सम्मिलित करते हुए, सकारात्मक सोच के साथ, भावनाओं का सम्मान करते हुए ही प्रमाणित किया गया है। ये पूरी निष्ठा से एक संतुलित और संवेदनशील निर्णय का प्रयास है।'
सेंसर बोर्ड चेयरमैन प्रसून जोशी ने साथ ही यह भी लिखा कि, 'अब थोड़ा विश्वास भी रखना होगा। विश्वास एक दूसरे पर भी और हमारी स्वयं की बनायी प्रक्रियाओं और संस्थाओं पर भी। विवादों की जगह विचार विमर्श को लेनी होगी, ताकि भविष्य में हमें इस सीमा तक जाने की आवश्यकता न पड़े।'
