'ब्रह्मोस' ने अब पोखरण टेस्ट भी किया पास, सुखोई से दागी गई दुनिया की सबसे तेज सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल
पोखरण (जैसलमेर)। राजस्थान के जैसलमेर जिले में पोखरण स्थित चांधन फायरिंग रेंज में आज सुबह भारत ने दुनिया की सबसे तेज सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल 'ब्रह्मोस' का एक बार फिर से सफलतापूर्वक परीक्षण किया है। सेना और डीआरडीओ के अधिकारियों की उपस्थिति में लिए गए इस टेस्ट में ब्रह्मोस मिसाइल ने सफलतापूर्वक सही निशाने को हिट कर टेस्ट को पास कर लिया है।
भारत और रूस के ज्वाइंट वेंचर के तौर पर विकसित की गई यह सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल कम ऊंचाई पर तेजी से उड़ान भरने और राडार की नजरों से बचने में माहिर मानी जाती है। इसकी रफ़्तार 2.8 मैक (ध्वनि की रफ़्तार के बराबर) है। इस मिसाइल की रेंज 290 किलोमीटर है और ये 300 किलोग्राम भारी युद्धक सामग्री अपने साथ ले जा सकती है।
ब्रह्मोस मिसाइल का नाम भी भारत की ब्रह्मपुत्र और रूस की मस्कवा नदी को जोड़कर ब्रह्मोस रखा गया है। यह मिसाइल रूस की पी-800 ओंकिस क्रूज मिसाइल की प्रौद्योगिकी पर आधारित है। यह मिसाइल भारत की अब तक की सबसे आधुनिक प्रक्षेपास्त्र प्रणाली है और इसने भारत को मिसाइल तकनीकी में अग्रणी देश बना दिया है।
ब्रह्मोस मिसाइल 3700 किलोमीटर प्रति घंटे की स्पीड से 290 किलोमीटर तक के ठिकानों पर अटैक कर सकती है। वहीं ब्रह्मोस मिसाइल की रेंज को अब 400 किलोमीटर तक बढ़ाया जा सकता है। ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज़ मिसाइलों को 40 सुखोई युद्धक विमानों में जोड़ने का काम जारी है, और माना जा रहा है कि क्षेत्र में नए उभरते सुरक्षा परिदृश्य में इस कदम से भारतीय वायुसेना की ज़रूरतें पूरी हो जाएंगी।
गौरतलब है कि ब्रह्मोस का पहला सफल परीक्षण 12 जून, 2001 को किया गया था। मौजूदा समय में यह थल व नौसेना की थाती तथा भारतीय वायु सेना के लड़ाकू बेड़े की रीढ़ बन चुका है। यह मिसाइल सबसे पहले 2005 में नौसेना को मिली थी। नौसेना के सभी डेस्ट्रॉयर और फ्रीगेट युद्धपोतों में ब्रह्मोस मिसाइल लगी हुई है।
भारत और रूस के ज्वाइंट वेंचर के तौर पर विकसित की गई यह सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल कम ऊंचाई पर तेजी से उड़ान भरने और राडार की नजरों से बचने में माहिर मानी जाती है। इसकी रफ़्तार 2.8 मैक (ध्वनि की रफ़्तार के बराबर) है। इस मिसाइल की रेंज 290 किलोमीटर है और ये 300 किलोग्राम भारी युद्धक सामग्री अपने साथ ले जा सकती है।
ब्रह्मोस मिसाइल का नाम भी भारत की ब्रह्मपुत्र और रूस की मस्कवा नदी को जोड़कर ब्रह्मोस रखा गया है। यह मिसाइल रूस की पी-800 ओंकिस क्रूज मिसाइल की प्रौद्योगिकी पर आधारित है। यह मिसाइल भारत की अब तक की सबसे आधुनिक प्रक्षेपास्त्र प्रणाली है और इसने भारत को मिसाइल तकनीकी में अग्रणी देश बना दिया है।
ब्रह्मोस मिसाइल 3700 किलोमीटर प्रति घंटे की स्पीड से 290 किलोमीटर तक के ठिकानों पर अटैक कर सकती है। वहीं ब्रह्मोस मिसाइल की रेंज को अब 400 किलोमीटर तक बढ़ाया जा सकता है। ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज़ मिसाइलों को 40 सुखोई युद्धक विमानों में जोड़ने का काम जारी है, और माना जा रहा है कि क्षेत्र में नए उभरते सुरक्षा परिदृश्य में इस कदम से भारतीय वायुसेना की ज़रूरतें पूरी हो जाएंगी।
गौरतलब है कि ब्रह्मोस का पहला सफल परीक्षण 12 जून, 2001 को किया गया था। मौजूदा समय में यह थल व नौसेना की थाती तथा भारतीय वायु सेना के लड़ाकू बेड़े की रीढ़ बन चुका है। यह मिसाइल सबसे पहले 2005 में नौसेना को मिली थी। नौसेना के सभी डेस्ट्रॉयर और फ्रीगेट युद्धपोतों में ब्रह्मोस मिसाइल लगी हुई है।
