राजे सरकार की गौरव यात्रा के विरोध में राजपूत आरक्षण मंच
जयपुर। राजस्थान में मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे द्वारा निकाले जाने वाली सुराज गौरव यात्रा को लेकर एक ओर जहां तैयारियां जोरों पर है, वहीं दूसरी ओर राजपूत आरक्षण मंच अब इसके विरोध में उतर आया है। गौरव यात्रा के विरोध में प्रदेश भर के राजपूत संगठनों ने एक स्वर में आवाज मुखरित की है। इसके तहत राजपूत आरक्षण मंच मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे द्वारा निकाले जाने वाली गौरव यात्रा का विरोध करेगा। रविवार को राजधानी जयपुर में प्रदेश भर के अलग-अलग संगठनों के प्रतिनिधियों की बैठक में इस प्रस्ताव पर सभी ने सहमति जताई।
बैठक में राजपूत आरक्षण मंच के अध्यक्ष संपत सिंह शेखावत, रिटायर्ड वरिष्ठ आईएएस अजय सिंह चितौड़ा, बसपा विधायक मनोज न्यांगली समेत करणी सेना के महिपाल सिंह मकराना और अजीत सिंह मामडोली भी मौजूद रहे। वहीं राजस्थान के अलग-अलग जिलों से आए अन्य राजपूत मंचों एवं संगठनो के प्रतिनिधि भी सभा में मौजूद थे। इस दौरान सभी ने एक स्पष्ट रणनीति के तहत ओबीसी आरक्षण दिए जाने तक राज्य सरकार और भाजपा के विरोध का फैसला किया। वहीं 9 सितंबर को जयपुर में एक बड़े सम्मेलन की घोषणा भी की गई।
इसके साथ ही राजपूत आरक्षण मंच के पदाधिकारियों ने यह घोषणा भी की है कि उनका कोई पदाधिकारी लोकसभा अथवा विधानसभा का चुनाव नहीं लड़ेगा और समाज को आरक्षण मिलने तक अपना संघर्ष जारी रखेंगे। कार्यक्रम में आए बसपा विधायक मनोज न्यागली ने साफ तौर पर कांग्रेस और बीजेपी पर निशाना साधा और राजपूतों को ओबीसी में शामिल नहीं किए जाने को लेकर अपने विधानसभा में उठाए सवालों पर गोलमोल जवाब देने के लिए भाजपा सरकार को जिम्मेदार ठहराया।
सम्मेलन में पूर्व वरिष्ठ आईएएस अजय सिंह चित्तौड़ा ने एक स्वर में समाज के इस प्रयास की पूरे प्रदेश में योजनाबद्ध तरीके से काम किए जाने की आवश्यकता जताई। सभा के अंत में प्रस्ताव पारित करते वक्त संपत सिंह शेखावत अध्यक्ष राजपूत आरक्षण मंच ने सरकार को 1 सप्ताह का वक्त दिया कि उन्होंने ओबीसी आयोग राजस्थान सरकार ने राजपूत आरक्षण मंच के लिए पत्र नहीं लिखा तो वह सरकार का विरोध जारी रखेंगे।
बैठक में राजपूत आरक्षण मंच के अध्यक्ष संपत सिंह शेखावत, रिटायर्ड वरिष्ठ आईएएस अजय सिंह चितौड़ा, बसपा विधायक मनोज न्यांगली समेत करणी सेना के महिपाल सिंह मकराना और अजीत सिंह मामडोली भी मौजूद रहे। वहीं राजस्थान के अलग-अलग जिलों से आए अन्य राजपूत मंचों एवं संगठनो के प्रतिनिधि भी सभा में मौजूद थे। इस दौरान सभी ने एक स्पष्ट रणनीति के तहत ओबीसी आरक्षण दिए जाने तक राज्य सरकार और भाजपा के विरोध का फैसला किया। वहीं 9 सितंबर को जयपुर में एक बड़े सम्मेलन की घोषणा भी की गई।
इसके साथ ही राजपूत आरक्षण मंच के पदाधिकारियों ने यह घोषणा भी की है कि उनका कोई पदाधिकारी लोकसभा अथवा विधानसभा का चुनाव नहीं लड़ेगा और समाज को आरक्षण मिलने तक अपना संघर्ष जारी रखेंगे। कार्यक्रम में आए बसपा विधायक मनोज न्यागली ने साफ तौर पर कांग्रेस और बीजेपी पर निशाना साधा और राजपूतों को ओबीसी में शामिल नहीं किए जाने को लेकर अपने विधानसभा में उठाए सवालों पर गोलमोल जवाब देने के लिए भाजपा सरकार को जिम्मेदार ठहराया।
सम्मेलन में पूर्व वरिष्ठ आईएएस अजय सिंह चित्तौड़ा ने एक स्वर में समाज के इस प्रयास की पूरे प्रदेश में योजनाबद्ध तरीके से काम किए जाने की आवश्यकता जताई। सभा के अंत में प्रस्ताव पारित करते वक्त संपत सिंह शेखावत अध्यक्ष राजपूत आरक्षण मंच ने सरकार को 1 सप्ताह का वक्त दिया कि उन्होंने ओबीसी आयोग राजस्थान सरकार ने राजपूत आरक्षण मंच के लिए पत्र नहीं लिखा तो वह सरकार का विरोध जारी रखेंगे।