तनाव/अवसाद : अकेला ना छोड़ें, बल्कि बात करें : 7 अप्रैल (विश्व स्वास्थ्य दिवस) पर विशेष
अजमेर। मस्तिष्क को जब पूरा आराम नहीं मिल पाता और उस पर हमेशा एक दबाव बना रहता तो इंसान तनावग्रस्त हो जाता है। तनाव से शरीर के होमियोस्टैसिस में गड़बड़ी होती है, जो किसी व्यक्ति की शारीरिक, मानसिक व मनोवैज्ञानिक कार्यप्रणाली को गड़बड़ा देती है। तनाव के कारण शरीर में कई हार्मोनों का स्तर बढ़ता जाता है, जिन में एड्रीनलीन और कार्टिसोल प्रमुख हैं। लगातार तनाव की स्थिति अवसाद में बदल जाती है। अवसाद से निबटने में एंटीडिप्रैसैंट देने से, झांड़फूंक और गंडाताबीज करवाने से या अस्पताल में भरती करा देने भर सेे कारगर नहीं होते, जितने जीवन में फिर से संतुलन लाने के प्रयास। उसे एक प्यार भरी थपकी देना जरूरी होता है। तनाव किसी भी उम्र में हो सकता है। अस्पतालों में ज्यादातर भीड़ 30 से 45 साल के लोगों की होती है।
तनाव /डिप्रेशन क्यों :
तनाव के पीछे व्यक्ति के व्यक्तिगत जीवन से जुड़ी कई चीजों की अहम भूमिका होती है, जैसे किसी प्रियजन का बिछुड़ना, नौकरी छूट जाना, विवाह संबंधों में टूटन, शिक्षा के क्षेत्र में असफलता आदि। जीवन के प्रति नकारात्मक सोच रखने वाले लोगों को भी अवसाद में जाने का ज्यादा डर रहता है। जैसे वे सोचते हैं कि मैं सफल नहीं होऊंगा, इसलिए यह कार्य नहीं कर सकता या फिर कई लोगों के मन में हमेशा कुछ न कुछ अनहोनी का डर रहता है, जिससे उन का अवसाद में जाने का खतरा बना रहता है। साथ ही कुछ स्वास्थ्य समस्याएं भी हैं, जिन के कारण व्यक्ति अवसाद में जा सकता है। जैसे थायराइड, विटामिन डी की कमी, कोई बड़ा ऑपरेशन आदि।
अवसाद के लक्षणों को पहचानें :
तनाव से निपटने के तरीके :
तनाव से निपटने के कई सही तरीके हैं, पर उन सभी के लिए बदलाव लाने की जरूरत होती है। या तो हम उन परिस्थितियों को बदल दें या उनके प्रति अपनी प्रतिक्रिया में परिवर्तन ले आएं। इन बातों के बारे में गंभीरता से सोचें तथा दूसरे व्यक्तियों से इसके बारे में बात करें, साथ ही उन्हें दूर करने या कम करने के उपाय अपनाएं या तनाव ग्रस्त व्यक्ति को उस स्थिति से बाहर निकालने का प्रयास करें, जो उसके तनाव का कारण है।
तनाव /डिप्रेशन क्यों :
तनाव के पीछे व्यक्ति के व्यक्तिगत जीवन से जुड़ी कई चीजों की अहम भूमिका होती है, जैसे किसी प्रियजन का बिछुड़ना, नौकरी छूट जाना, विवाह संबंधों में टूटन, शिक्षा के क्षेत्र में असफलता आदि। जीवन के प्रति नकारात्मक सोच रखने वाले लोगों को भी अवसाद में जाने का ज्यादा डर रहता है। जैसे वे सोचते हैं कि मैं सफल नहीं होऊंगा, इसलिए यह कार्य नहीं कर सकता या फिर कई लोगों के मन में हमेशा कुछ न कुछ अनहोनी का डर रहता है, जिससे उन का अवसाद में जाने का खतरा बना रहता है। साथ ही कुछ स्वास्थ्य समस्याएं भी हैं, जिन के कारण व्यक्ति अवसाद में जा सकता है। जैसे थायराइड, विटामिन डी की कमी, कोई बड़ा ऑपरेशन आदि।
अवसाद के लक्षणों को पहचानें :
- अत्यंत संवेदनशील हो जाना।
- ज्यादा या कम भूख लगना।
- कम या ज्यादा नींद आना।
- गुस्सा और चिड़चिड़ापन।
- थकान और ऊर्जा की कमी।
- पेटदर्द या सिरदर्द।
- ध्यान केंद्रित करने में समस्या।
- खोया खोया रहना।
- अधिक चिड़चिड़ापन रहना।
तनाव से निपटने के तरीके :
तनाव से निपटने के कई सही तरीके हैं, पर उन सभी के लिए बदलाव लाने की जरूरत होती है। या तो हम उन परिस्थितियों को बदल दें या उनके प्रति अपनी प्रतिक्रिया में परिवर्तन ले आएं। इन बातों के बारे में गंभीरता से सोचें तथा दूसरे व्यक्तियों से इसके बारे में बात करें, साथ ही उन्हें दूर करने या कम करने के उपाय अपनाएं या तनाव ग्रस्त व्यक्ति को उस स्थिति से बाहर निकालने का प्रयास करें, जो उसके तनाव का कारण है।
- परिस्थिति को बदलें।
- तनाव पैदा करने वाले कारकों से बचे।
- अपनी प्रतिक्रिया में बदलाव लाएं।
- तनाव पैदा करने वाले कारकों के मुताबिक अनुकूलित हो जाएं।
- तनाव पैदा करने वाले कारकों को स्वीकार कर लें।
- अनावश्यक तनाव से बचें।
- ‘ नहीं’ कहना सीखें– अपनी सीमा को जानें और हमेशा उसका ध्यान रखें।
- ऐसे लोगों से बचें जिनसे आपको तनाव पैदा होता है।
- अपने परिवेश को नियंत्रण में रखें।
