अपने नाम के आगे प्रोफेसर लगाने पर हाईकोर्ट ने दिया वासुदेव देवनानी को नोटिस
जयपुर। अपने नाम के आगे प्रोफ़ेसर लगाने के मामले में राजस्थान हाईकोर्ट ने मुख्य सचिव एवं शिक्षा राज्य मंत्री वासुदेव देवनानी को नोटिस जारी किया है, जिसमें उनसे पूछा गया है कि देवनानी अपने नाम के आगे प्रोफेसर क्यों लगाते हैं। इसके साथ ही 4 सप्ताह में जवाब पेश करने के दिये आदेश दिए गए हैं। न्यायाधीश मनीष भंडारी ने ये आदेश अजमेर निवासी लोकेश शर्मा की उस याचिका पर दिए हैं, जिसमें ये पूछा गया है कि केवल प्रोफ़ेसर पदधारी ही अपने नाम के आगे प्रोफ़ेसर लगा सकते हैं, जबकि देवनानी के पास न तो प्रोफ़ेसर पद की योग्यता है और न वे कभी प्रोफ़ेसर रहे हैं।
याचिका में कहा गया कि राज्य सरकार के मंत्री वासुदेव देवनानी की शैक्षणिक योग्यता स्नातक है। इसके बावजूद भी उनकी ओर से अपने नाम के आगे प्रोफेसर शब्द लिखा जाता है। सरकारी वेब पोर्टल और शिलान्यास पट्टों के साथ-साथ इनके आवास और कार्यालय की नेम प्लेट पर भी नाम से पहले प्रोफेसर लिखा गया है। इस बारे में सरकार और लोकायुक्त को शिकायत की जा चुकी है, लेकिन अभी तक कोई कार्यवाही नहीं हुई है।
याचिका में अधिवक्ता मंजीत कौर ने बताया कि जो व्यक्ति प्रोफेसर के पद पर है या उस पद से सेवानिवृत्त हुआ है। वहीं अपने नाम के आगे प्रोफेसर पद लिख सकता है। यहां तक की प्रोफेसर पद के लिए केवल पात्रता रखने वाला व्यक्ति भी अपने नाम के आगे प्रोफेसर नहीं लिख सकता।
याचिका में बताया गया है कि शिकायत के बाद लोकायुक्त की कार्रवाई में सामने आया कि वे केवल प्राचार्य पद पर रहे हैं। उनकी ओर से प्रोफेसर शब्द केवल सम्मान के लिए लगाया जाता है, जिस पर सुनवाई करते हुए एकलपीठ ने मुख्य सचिव और मंत्री देवनानी को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है और 4 सप्ताह में जवाब पेश करने के दिये आदेश दिए गए हैं।
याचिका में कहा गया कि राज्य सरकार के मंत्री वासुदेव देवनानी की शैक्षणिक योग्यता स्नातक है। इसके बावजूद भी उनकी ओर से अपने नाम के आगे प्रोफेसर शब्द लिखा जाता है। सरकारी वेब पोर्टल और शिलान्यास पट्टों के साथ-साथ इनके आवास और कार्यालय की नेम प्लेट पर भी नाम से पहले प्रोफेसर लिखा गया है। इस बारे में सरकार और लोकायुक्त को शिकायत की जा चुकी है, लेकिन अभी तक कोई कार्यवाही नहीं हुई है।
याचिका में अधिवक्ता मंजीत कौर ने बताया कि जो व्यक्ति प्रोफेसर के पद पर है या उस पद से सेवानिवृत्त हुआ है। वहीं अपने नाम के आगे प्रोफेसर पद लिख सकता है। यहां तक की प्रोफेसर पद के लिए केवल पात्रता रखने वाला व्यक्ति भी अपने नाम के आगे प्रोफेसर नहीं लिख सकता।
याचिका में बताया गया है कि शिकायत के बाद लोकायुक्त की कार्रवाई में सामने आया कि वे केवल प्राचार्य पद पर रहे हैं। उनकी ओर से प्रोफेसर शब्द केवल सम्मान के लिए लगाया जाता है, जिस पर सुनवाई करते हुए एकलपीठ ने मुख्य सचिव और मंत्री देवनानी को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है और 4 सप्ताह में जवाब पेश करने के दिये आदेश दिए गए हैं।
