दरगाह दीवान के बीफ और ट्रिपल तलाक वाले बयान पर विवाद, भाई ने ही जताई आपत्ति, गद्दी पर जमाया कब्जा
अजमेर। सूफी संत हजरत मोईनुद्दीन चिश्ती की विश्वविख्यात ख़्वाजा गरीब नवाज की अजमेर स्थित दरगाह में चल रहे 805वें उर्स के मौके पर दरगाह दीवान सैयद जैनुअल आबेदीन अली द्वारा गोमांस (बीफ) के सेवन पर रोक लगाए जाने और तीन तलाक को लेकर दिए बयान को लेकर बखेड़ा खड़ा हो गया है। खास बात ये है कि यह बखेेड़ा किसी और ने नहीं, बल्कि दरगाह दीवान के भाई सैयद अलाउद्दीन आलिमी ने उठाया है।
अलाउद्दीन आलिमी ने दरगाह दीवान के बयान पर आपत्ति जताते हुए जैनुअल आबेदीन दरगाह दीवान के पद से हटाने का ऐलान किया है। इतना ही नहीं अलाउद्दीन ने तो खुद को हजरत मोईनुद्दीन चिश्ती दरगाह का दीवान भी घोषित कर दिया। अलाउद्दीन ने दरगाह दीवान के तीन तलाक पर दिए बयान को लेकर उन पर कुरआन के खिलाफ बयान देने का आरोप लगाया है। साथ ही उनका ये भी कहना है कि इस बयान के बाद जेनुअल ओबेद्दीन अब दरगाह दीवान की गद्दी के लायक नहीं रहे हैं।
गौरतलब है कि अलाउद्दीन ने दरगाह दीवान सैयद जैनुअल आबेदीन के बीफ पर दिए बयान के एक दिन बाद ये ऐलान किया है। इससे पूर्व कल ही दरगाह दीवान सैयद जैनुअल आबेदीन ने अपने बयान में कहा था कि गाय का मांस खाने की मनाही इस्लाम की धार्मिक पुस्तक में भी है। हमारे मुल्क में सभी धर्मों के लोग रहते हैं, जहां गंगा—जमुनी तहजीब बरकरार है। ऐसे में इस मुल्क की गंगा जमुनी तहजीब को बरकरार रखते हुए हमें एक दूसरे की धार्मिक भावनाओ का ख्याल रखना चाहिए और बीफ खाना बंद कर देना चाहिए। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि बीफ नहीं खाने की शुरुआत वे खुद और अपने खानदान से कर रहे हैं।
अजमेर दरगाह के दीवान ने कहा कि हमारे हिंदू भाई गाय को माता का दर्जा देकर उसका सम्मान करते हैं। दूसरे धर्म के लोगों की भावनाओं का सम्मान करना इस्लाम के मूल सिद्धांतों में से एक है। हम अपने हिंदू भाइयों से अपील करते हैं कि जब तक गोमांस पर रोक की मांग को स्वीकार कर नहीं लिया जाता, तब हमारे साथ खड़े रहें। वहीं अजमेर दरगाह में जुटे सूफी संतों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से पूरे देश में गोमांस की बिक्री पर रोक लगाने की मांग की थी।
सम्बंधित खबर यहां पढ़ें : अजमेर दरगाह दीवान समेत कई सूफी संतों ने की बीफ पर बैन लगाए की मांग, तीन तलाक को बताया गलत
अलाउद्दीन आलिमी ने दरगाह दीवान के बयान पर आपत्ति जताते हुए जैनुअल आबेदीन दरगाह दीवान के पद से हटाने का ऐलान किया है। इतना ही नहीं अलाउद्दीन ने तो खुद को हजरत मोईनुद्दीन चिश्ती दरगाह का दीवान भी घोषित कर दिया। अलाउद्दीन ने दरगाह दीवान के तीन तलाक पर दिए बयान को लेकर उन पर कुरआन के खिलाफ बयान देने का आरोप लगाया है। साथ ही उनका ये भी कहना है कि इस बयान के बाद जेनुअल ओबेद्दीन अब दरगाह दीवान की गद्दी के लायक नहीं रहे हैं।
गौरतलब है कि अलाउद्दीन ने दरगाह दीवान सैयद जैनुअल आबेदीन के बीफ पर दिए बयान के एक दिन बाद ये ऐलान किया है। इससे पूर्व कल ही दरगाह दीवान सैयद जैनुअल आबेदीन ने अपने बयान में कहा था कि गाय का मांस खाने की मनाही इस्लाम की धार्मिक पुस्तक में भी है। हमारे मुल्क में सभी धर्मों के लोग रहते हैं, जहां गंगा—जमुनी तहजीब बरकरार है। ऐसे में इस मुल्क की गंगा जमुनी तहजीब को बरकरार रखते हुए हमें एक दूसरे की धार्मिक भावनाओ का ख्याल रखना चाहिए और बीफ खाना बंद कर देना चाहिए। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि बीफ नहीं खाने की शुरुआत वे खुद और अपने खानदान से कर रहे हैं।
अजमेर दरगाह के दीवान ने कहा कि हमारे हिंदू भाई गाय को माता का दर्जा देकर उसका सम्मान करते हैं। दूसरे धर्म के लोगों की भावनाओं का सम्मान करना इस्लाम के मूल सिद्धांतों में से एक है। हम अपने हिंदू भाइयों से अपील करते हैं कि जब तक गोमांस पर रोक की मांग को स्वीकार कर नहीं लिया जाता, तब हमारे साथ खड़े रहें। वहीं अजमेर दरगाह में जुटे सूफी संतों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से पूरे देश में गोमांस की बिक्री पर रोक लगाने की मांग की थी।
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