वादे पर खरा उतरी यूपी की योगी सरकार, 1 लाख तक के कर्ज वाले 2 करोड़ से ज्यादा किसानों का कर्ज माफ
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव के समय में किए गए वादे को आज सूबे की योगी सरकार ने पूरा किया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार ने आज यूपी में 2 करोड़ से ज्यादा किसानों का करीब साढ़े 36 हजार करोड़ रुपए का कर्ज माफ कर दिया है। यूपी सरकार ने 1 लाख रुपए तक का कर्ज वाले किसानों का ये कर्ज माफ करके उन्हें एक बहुत बड़ी सौगात दी है। सरकार ने इन किसानों का कुल मिलाकर 36,359 करोड़ रुपये का कर्ज माफ करने का निर्णय लिया है।
लखनऊ के लोकभवन में हुई यह बैठक डेढ़ घंटे चली। इस बैठक में सीएम आदित्यनाथ, केशव प्रसाद मौर्य के अलावा तमाम मंत्री शामिल हुए। सूबे के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई प्रदेश मंत्रिपरिषद की पहली बैठक में राज्य के किसानों के हित में ये बड़ा फैसला किया गया, जो विधानसभा चुनाव से पूर्व भाजपा के लोक कल्याण संकल्प पत्र में प्रमुख मुद्दा था।
कैबिनेट बैठक के बाद स्वास्थ्य मंत्री सिद्धार्थनाथ सिंह ने यहां पत्रकारों से कहा कि लघु एवं सीमांत किसानों के विषय में जो महत्वपूर्ण निर्णय कैबिनेट ने किया है, वह फसली कर्ज से संबंधित है। गत वर्ष सूखा पड़ा, ओलावृष्टि हुई और बाढ़ आई जिससे किसानों को काफी नुकसान हुआ। उत्तर प्रदेश में लगभग दो करोड़ 30 लाख किसान हैं, जिनमें से 92.5 प्रतिशत यानी 2.15 करोड लघु एवं सीमांत किसान हैं'।
उन्होंने कहा कि, उनका कर्ज माफ किया गया है। कुल 30,729 करोड़ रुपए का कर्ज माफ किया गया है, क्योंकि ये किसान बड़ा ऋण नहीं लेते। इसी अंदाज से एक लाख रुपए तक का ऋण उनके खाते से माफ किया जाएगा।' लघु व सीमांत किसानों के फसली ऋण को माफ करने की योजना तैयार करने के लिए मुख्य सचिव की अध्यक्षता में आठ सदस्यीय समिति गठित करने का भी प्रस्ताव है। यह समिति कर्जमाफी योजना को अमली जामा पहनाने के लिए संसाधनों की व्यवस्था करने के उपाय सुझाएगी और योजना से जुड़ी सभी प्रक्रियाएं तय तय करेगी।
बीजेपी ने चुनाव के लिए जारी अपने संकल्प पत्र में जो सबसे प्रमुख वादा किया था, वह किसानों की कर्जमाफी का ही था। अब सरकार इसका ऐलान करने जा रही है, लेकिन इससे सरकार के खजाने पर भारी बोझ आएगा। केंद्र सरकार ने यह भी स्पष्ट किया था कि यह व्यवस्था राज्य को अपने स्तर पर ही करनी होगी।
गौरतलब है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 13 फरवरी को लखीमपुर खीरी के राजकीय इंटर कालेज मैदान में आयोजित चुनावी रैली में एलान किया था कि भाजपा सरकार बनने पर पहली कैबिनेट में किसानों का कर्ज माफ कर दिया जाएगा। लिहाजा योगी सरकार कैबिनेट की पहली बैठक में कर्ज के बोझ से कराहते अन्नदाताओं के फसली ऋण को माफ करने के प्रस्ताव पर मुहर लगाते हुए उन्हें राहत प्रदान की है।
लखनऊ के लोकभवन में हुई यह बैठक डेढ़ घंटे चली। इस बैठक में सीएम आदित्यनाथ, केशव प्रसाद मौर्य के अलावा तमाम मंत्री शामिल हुए। सूबे के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई प्रदेश मंत्रिपरिषद की पहली बैठक में राज्य के किसानों के हित में ये बड़ा फैसला किया गया, जो विधानसभा चुनाव से पूर्व भाजपा के लोक कल्याण संकल्प पत्र में प्रमुख मुद्दा था।
कैबिनेट बैठक के बाद स्वास्थ्य मंत्री सिद्धार्थनाथ सिंह ने यहां पत्रकारों से कहा कि लघु एवं सीमांत किसानों के विषय में जो महत्वपूर्ण निर्णय कैबिनेट ने किया है, वह फसली कर्ज से संबंधित है। गत वर्ष सूखा पड़ा, ओलावृष्टि हुई और बाढ़ आई जिससे किसानों को काफी नुकसान हुआ। उत्तर प्रदेश में लगभग दो करोड़ 30 लाख किसान हैं, जिनमें से 92.5 प्रतिशत यानी 2.15 करोड लघु एवं सीमांत किसान हैं'।
उन्होंने कहा कि, उनका कर्ज माफ किया गया है। कुल 30,729 करोड़ रुपए का कर्ज माफ किया गया है, क्योंकि ये किसान बड़ा ऋण नहीं लेते। इसी अंदाज से एक लाख रुपए तक का ऋण उनके खाते से माफ किया जाएगा।' लघु व सीमांत किसानों के फसली ऋण को माफ करने की योजना तैयार करने के लिए मुख्य सचिव की अध्यक्षता में आठ सदस्यीय समिति गठित करने का भी प्रस्ताव है। यह समिति कर्जमाफी योजना को अमली जामा पहनाने के लिए संसाधनों की व्यवस्था करने के उपाय सुझाएगी और योजना से जुड़ी सभी प्रक्रियाएं तय तय करेगी।
बीजेपी ने चुनाव के लिए जारी अपने संकल्प पत्र में जो सबसे प्रमुख वादा किया था, वह किसानों की कर्जमाफी का ही था। अब सरकार इसका ऐलान करने जा रही है, लेकिन इससे सरकार के खजाने पर भारी बोझ आएगा। केंद्र सरकार ने यह भी स्पष्ट किया था कि यह व्यवस्था राज्य को अपने स्तर पर ही करनी होगी।
गौरतलब है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 13 फरवरी को लखीमपुर खीरी के राजकीय इंटर कालेज मैदान में आयोजित चुनावी रैली में एलान किया था कि भाजपा सरकार बनने पर पहली कैबिनेट में किसानों का कर्ज माफ कर दिया जाएगा। लिहाजा योगी सरकार कैबिनेट की पहली बैठक में कर्ज के बोझ से कराहते अन्नदाताओं के फसली ऋण को माफ करने के प्रस्ताव पर मुहर लगाते हुए उन्हें राहत प्रदान की है।
