पाकिस्तान में बैन हुई अक्षय कुमार की फिल्म 'पेडमैन'
कराची। पाकिस्तान में अक्षय कुमार की फिल्म 'पैडमैन' पर सेंसर बोर्ड ने बैन लगा दिया है। यहां के फेडरल सेंसर बोर्ड ने इस मूवी पर बैन लगाते हुए कहा कि पैडमैन मूवी हमारे ट्रेडिशन और कल्चर के खिलाफ है। इसलिए हम अपनी डिस्ट्रीब्यूटर्स को पैडमैन मूवी की इंपोर्ट करने की इजाजत नहीं दे सकते।
गौरतलब है कि पैडमैन फिल्म में महिलाओं के पीरियड्स से संबंधित कई बातें बताई गई है। साथ ही सामान्यतया पीरियड्स के संबंध में जो गलत बातें प्रचलित है, उन्हें लेक्ट भ्रांतियां दूर करने की कोशिश की गई है। इसके साथ ही पाकिस्तान सेंसर बोर्ड ने यह भी कहा कि पैडमैन एक टैबू सब्जेक्ट पर बनाई गई फिल्म है। इसलिए हमारे कल्चर सोसाइटी और मजहब में इस तरह की बातों के लिए कोई जगह नहीं है।
वहीं पाकिस्तान के जाने-माने फिल्म मेकर सैयद नूर ने भी यह कहा कि पैडमैन ही क्यों फिल्म पद्मावत भी पाकिस्तान में बेन होनी चाहिए। क्योंकि इस मूवी में मुसलमानों को गलत तरीके से पेश किया गया है।
फिल्म पैडमैन तमिलनाडु के पदम अवार्डी अरुणाचलम मुरुगनाथम की बायोपिक बेस्ट है, जिसमें अक्षय कुमार एक सोशल वर्कर का रोल प्ले कर रहे हैं। उसी के साथ अक्षय की पत्नी का किरदार राधिका आप्टे निभा रही है। फिल्म पैडमैन में महिलाओं के लिए सेंटेनरी नैपकिन बनाने की मशीन का अविष्कार कर ग्रामीण इलाकों में जागरूकता फैलाने का संघर्ष दिखाया गया है।
गौरतलब है कि पैडमैन फिल्म में महिलाओं के पीरियड्स से संबंधित कई बातें बताई गई है। साथ ही सामान्यतया पीरियड्स के संबंध में जो गलत बातें प्रचलित है, उन्हें लेक्ट भ्रांतियां दूर करने की कोशिश की गई है। इसके साथ ही पाकिस्तान सेंसर बोर्ड ने यह भी कहा कि पैडमैन एक टैबू सब्जेक्ट पर बनाई गई फिल्म है। इसलिए हमारे कल्चर सोसाइटी और मजहब में इस तरह की बातों के लिए कोई जगह नहीं है।
वहीं पाकिस्तान के जाने-माने फिल्म मेकर सैयद नूर ने भी यह कहा कि पैडमैन ही क्यों फिल्म पद्मावत भी पाकिस्तान में बेन होनी चाहिए। क्योंकि इस मूवी में मुसलमानों को गलत तरीके से पेश किया गया है।
फिल्म पैडमैन तमिलनाडु के पदम अवार्डी अरुणाचलम मुरुगनाथम की बायोपिक बेस्ट है, जिसमें अक्षय कुमार एक सोशल वर्कर का रोल प्ले कर रहे हैं। उसी के साथ अक्षय की पत्नी का किरदार राधिका आप्टे निभा रही है। फिल्म पैडमैन में महिलाओं के लिए सेंटेनरी नैपकिन बनाने की मशीन का अविष्कार कर ग्रामीण इलाकों में जागरूकता फैलाने का संघर्ष दिखाया गया है।